Tuesday, 2 April 2013

TALAASH.........

आओ  आज फिर जिन्दगी की तलाश करते हैं।
 ज़रा देर के लिए ही सही मगर ,
इस चिलचिलाती धूप में,
आओ आज किसी छांव की तलाश करते हैं।।
अरशों पूरानी हो चुकी हैं ये दीवारें,
आओ इनकी उखड़ी सी दरारों में ,
किसी फुरसत भरे लम्हे की तलाश करते हैं।।
बड़ी तंगहाल हैं मुहल्ले की गलियाँ,
आओ अब इन रास्तों का बहिष्कार  करते हैं।।
एक अर्शा बीता दीवाली मनाये,
आओ आज फिर किसी नदीम के घर ,
एक दीपक  उजियार करते हैं।।
बड़ी लम्बी हुई ये जालिम जुदाई,
आओ आज साथ मिल रोज़ों का इफ़्तार करते हैं।।
बड़े गहरे जख्म हैं इतिहास के,
कुछ तुम भूलो कुछ हम भूलें।
आओ आज साथ मिल,
किसी पगडण्डी की तलाश करते हैं।।
बहूत भीड़ हैं इन शहरों में,
आओ आज गाँव की किसी,
धुल भरी सड़क की तलाश करते हैं।। 

                                                     PRANI........