Monday, 18 February 2013

kuch bikhare se shair

टूटा हुआ दिल लिखा है जरा इनायत से पढना।
लहू को बेरंग आंसू लिखा है,शिकायत ना करना।
ऐ मेरे  मगरूर  सनम,तोड़ा है दिल मेरा,फिर
किसी और से मोहब्बत करने की,हिमाकत ना करना।।


आँखे,होठ,दिल और जबां ,इन्हें रखना जरा महफूज।
तुम तो ना कहोगे,
कंही ऐसा ना हो ,ये सब मिलकर कह दें हमे महबूब।।

ये आँखों का आँखों से मिलना सनम,
ये पलकों का हया से झुकना सनम,
यूं ही बेवजह तो ना होगा।
जरूर तेरे दिल में मेरा ख्वाब होगा।।

इन आँखों की शोखियों को ना  छेड़ो जनाब,
की इनमे किसी का आशियाना बसा है।
इन होठों को मेरे होठों से लगाओ तो मेरी जान।,
की इनमे मेरी  मोहब्बत का पैमाना भरा है।।

एक शाम मुझे मिल तो सही,
तुझे मोहब्बत करना सिखा दूं।
एक रोज मेरे साथ मैखाने चल तो सही,
तुझे तन्हाई से दोस्ती करना सिखा  दूं।।

Thursday, 7 February 2013

MERI KAHANI.

ये जो मेरे पैरों की दरारें हैं,
ये दिखती तो सबको हैं,मगर कम्बक्त ,
चुभती शिर्फ़ मुझको हैं।
कोई लाखों तराने लिख जाता  है इन पर,
तो कोई मशहूर चित्रों से कर जाता है इनको।
अरबों में समाई इनकी कमाई है,मगर फिर भी,
फटी से साडी में बैठी वो मेरी लुगाई है।
मेरे मोहल्ले की बड़ी दूर तलक दुहाई है,
क्यूंकि यंहा हर एक के हाथों में,
जादे छाले होने की  लड़ाई है।
बड़े दिलकश से हैं ये वादे तुम्हारे,
माना की कर दोगे मशहूर इस शहर को,
अपनी इबारत से,मगर  हम तो होंगे ना ,
बड़ी दूर उस ईमारत से।
यंहा जूठन में पलती है जिंदगानी हमारी,
वंहा आप खाते हैं भरपेट लिखकर,
गरीबी की कहानी हमारी।
मौत भी होती है गुमनामी में हमारी और,
आप होते हैं मशहूर छाप कर मौत की कहानी हमारी।
इस शहर हाल है कुछ यूं  की
मौत है सस्ती बड़ी मगर कम्बक्त बड़ी महंगी,
यंहा जिंदगानी है।

                                                    P R A N I....