tried some in ANUPRASH ALANKAAR...(repetition of a word many times... )
मय =घमण्ड
* मेरा मय मुझको ही मारे,
और मैं जानु ना।
या फिर जानु सबकुछ मैं ,
और करूँ कछ नाय।
मेरा मय कहता है मुझसे ,
मुझसे बड़ा ना कोई ,
और मैं कहके हाँ इस मन में ,
देता मय को बढ़ा।
फिर कोई कहता जो मुझसे ,
मैं रहता हूँ मेरे मय में।
मैं कहता हूँ झूठा है तू ,
तुझको यूँ दिखता है क्योंकि ,
तू रहता है तेरे मय में।
मेरा मय कहता है मुझसे ,
मैं इस नगरी का वासी हूँ ,
तेरा मय कहता है तुझसे ,
तू उस नगरी का वासी है।
इस झूठे मय के चक्कर में,
मैं भी भूला तू भी भूला ,
हम एक धरा के वासी हैं।
इस मय ने खींची दीवार ऐसी की ,
मैं मेरे को हिंदुस्तान कहता हूँ,
तू तेरे को पाकिस्तान कहता है।
PRANI....
मय =घमण्ड
* मेरा मय मुझको ही मारे,
और मैं जानु ना।
या फिर जानु सबकुछ मैं ,
और करूँ कछ नाय।
मेरा मय कहता है मुझसे ,
मुझसे बड़ा ना कोई ,
और मैं कहके हाँ इस मन में ,
देता मय को बढ़ा।
फिर कोई कहता जो मुझसे ,
मैं रहता हूँ मेरे मय में।
मैं कहता हूँ झूठा है तू ,
तुझको यूँ दिखता है क्योंकि ,
तू रहता है तेरे मय में।
मेरा मय कहता है मुझसे ,
मैं इस नगरी का वासी हूँ ,
तेरा मय कहता है तुझसे ,
तू उस नगरी का वासी है।
इस झूठे मय के चक्कर में,
मैं भी भूला तू भी भूला ,
हम एक धरा के वासी हैं।
इस मय ने खींची दीवार ऐसी की ,
मैं मेरे को हिंदुस्तान कहता हूँ,
तू तेरे को पाकिस्तान कहता है।
PRANI....