Tuesday, 19 November 2013

मय

tried some in ANUPRASH ALANKAAR...(repetition of a word many times...  )

मय =घमण्ड 

* मेरा मय मुझको ही मारे,

 और मैं जानु ना। 

या फिर जानु सबकुछ मैं ,

और करूँ कछ नाय। 

मेरा मय  कहता है मुझसे ,

मुझसे बड़ा ना कोई ,

और मैं कहके हाँ इस मन में ,

देता मय को बढ़ा। 

फिर कोई कहता   जो मुझसे ,

मैं रहता  हूँ मेरे मय में। 

मैं कहता हूँ झूठा है तू ,

तुझको यूँ दिखता है क्योंकि ,

तू रहता है तेरे मय में। 

मेरा मय  कहता है मुझसे ,

मैं इस  नगरी का वासी हूँ ,

तेरा मय कहता है तुझसे ,

तू उस नगरी का  वासी है। 

इस झूठे मय के चक्कर में,

मैं भी  भूला तू भी भूला ,

 हम एक धरा के वासी हैं। 

इस मय ने खींची दीवार ऐसी की ,

मैं मेरे को हिंदुस्तान कहता हूँ,

तू तेरे को पाकिस्तान कहता है। 

                                             PRANI....