विरक्ति या आशक्ति, बस जीवन की अभिव्यक्ति।
संयोग की अभिलाषा या फिर वियोग की परिभाषा।
धूमिल जीवन, उजड़ा गुलशन,झिलमिल चिलमन।
……यादों के एक कहानी है,धागे में जिसे पिरोनी है।
घिरता अम्बर या ढलती सी शाम,
काश की कुछ तो हो मेरे भी साथ।
…… यादों की एक कहानी है,धागे में जिसे पिरोनी है,
शायद फिर उनमें रंग भरें,
टूटे सपनों को पंख लगें।।
निर्झर सा तन,पतझर सा मन,
काली सी रात,खाली सी बात,
काश की हो मेरे भी साथ।
…… यादों की एक कहानी है,धागे में जिसे पिरोनी है।
फिर शायद मालाएं भी गूथूंगा उनसे,
एक शाम मिल पूछूंगा उनसे।
शायद की उनके गले पड़े,
या टूट हवा में बिखर पड़ें।
ये वक़्त बुरा था जीवन का,
या सुन्दरता की अभिलाषा थी।
भटका सा पथ,भूली सी राह,
या सब बस पलकों का मयजाल।
सपनों का रंग तो नीला है,
शायद की दामन गीला है,छोड़ो भी अब जाने दो,
मेरा जीवन ही कुछ धीमा है,
शायद ये मेरे अरमानों की सीमा है।
काश कभी मुड़ पाउँगा मैं,
लौट यंही आऊंगा फिर मैं,
आखिर……. यादों की एक कहानी है,
उनको भी तो अभी सुनानी है………
PRA.NI.
संयोग की अभिलाषा या फिर वियोग की परिभाषा।
धूमिल जीवन, उजड़ा गुलशन,झिलमिल चिलमन।
……यादों के एक कहानी है,धागे में जिसे पिरोनी है।
घिरता अम्बर या ढलती सी शाम,
काश की कुछ तो हो मेरे भी साथ।
…… यादों की एक कहानी है,धागे में जिसे पिरोनी है,
शायद फिर उनमें रंग भरें,
टूटे सपनों को पंख लगें।।
निर्झर सा तन,पतझर सा मन,
काली सी रात,खाली सी बात,
काश की हो मेरे भी साथ।
…… यादों की एक कहानी है,धागे में जिसे पिरोनी है।
फिर शायद मालाएं भी गूथूंगा उनसे,
एक शाम मिल पूछूंगा उनसे।
शायद की उनके गले पड़े,
या टूट हवा में बिखर पड़ें।
ये वक़्त बुरा था जीवन का,
या सुन्दरता की अभिलाषा थी।
भटका सा पथ,भूली सी राह,
या सब बस पलकों का मयजाल।
सपनों का रंग तो नीला है,
शायद की दामन गीला है,छोड़ो भी अब जाने दो,
मेरा जीवन ही कुछ धीमा है,
शायद ये मेरे अरमानों की सीमा है।
काश कभी मुड़ पाउँगा मैं,
लौट यंही आऊंगा फिर मैं,
आखिर……. यादों की एक कहानी है,
उनको भी तो अभी सुनानी है………
PRA.NI.