Monday, 18 February 2013

kuch bikhare se shair

टूटा हुआ दिल लिखा है जरा इनायत से पढना।
लहू को बेरंग आंसू लिखा है,शिकायत ना करना।
ऐ मेरे  मगरूर  सनम,तोड़ा है दिल मेरा,फिर
किसी और से मोहब्बत करने की,हिमाकत ना करना।।


आँखे,होठ,दिल और जबां ,इन्हें रखना जरा महफूज।
तुम तो ना कहोगे,
कंही ऐसा ना हो ,ये सब मिलकर कह दें हमे महबूब।।

ये आँखों का आँखों से मिलना सनम,
ये पलकों का हया से झुकना सनम,
यूं ही बेवजह तो ना होगा।
जरूर तेरे दिल में मेरा ख्वाब होगा।।

इन आँखों की शोखियों को ना  छेड़ो जनाब,
की इनमे किसी का आशियाना बसा है।
इन होठों को मेरे होठों से लगाओ तो मेरी जान।,
की इनमे मेरी  मोहब्बत का पैमाना भरा है।।

एक शाम मुझे मिल तो सही,
तुझे मोहब्बत करना सिखा दूं।
एक रोज मेरे साथ मैखाने चल तो सही,
तुझे तन्हाई से दोस्ती करना सिखा  दूं।।

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