अच्छा तो आप लिखना चाहते हैं ??
विषय क्या होगा ??
क्या कहा ??
सोचा नहीं !!
लिखिएगा आप भी सबकी तरह,
उनके चेहरे का खूबसूरत रंग,
या फिर उनकी कमर का खूबशूरत मोड़।
कभी फुर्सत मिले श्रृंगार से तो,
लिखिएगा फुलवा चाची की व्यथा,
उसकी फटी साडी के भीगे पल्लू का दर्द ,
लिखिएगा उसकी बहती आँखों का मर्म,
उसका पुत्र और बहु के प्रति वात्सल्य ,
लिखिएगा कैसे मोहताज़ है,
भोजन को वो ,
कैसी लाचार है जीवन को वो।
लेकिन कँहा हो पाएगा ये,
आपकी xcel शीटों से भरी जिंदगी से,
अगर मिलेगा आपको थोड़ा सा वक़्त,
तो आप तो लिखेंगे ना उनके सुर्ख लाल होंठ।
अगर वक़्त मिल जाये इन सबसे ,
तो लिखिएगा उस कुतिया की कथा,
जो कल ट्रक के नीचे आकर चिपट गयी ,
और लिखिएगा उसके नवजात पिल्लों की व्यथा,
किंकियाते रहे वंही जो चारो ओर ,
खींचते रहे स्तनों को उसको ,
दूध के मोह में,
लिखिएगा कितने व्यस्त थे उस वक़्त आप ,
लिखने में उनकी साड़ी के पल्लू का रंग।
अगर साहस हो कलम में,
तो लिखिएगा इखलाख की कहानी ,
लिखिएगा उस भीड़ का रोष, लिखिएगा लाठी की हर चोट,
लिखिएगा जरूर उसका दोष ,
और अगर हिलने लगे कलम,
तो लिख दीजिएगा बीफ़ को गाय का गोश्त।
क्या कहा ??
बहुत दर्द है इन सबमें !!
लोग सुनना पसंद नहीं करेंगे !!
अजी ये कविता कन्हा है ??
ये तो आईना है।
और जिसको आइना देखने से गुरेज़ हो ,
उसकी मानसिकता पे सवाल जरूर उठाइएगा।
ख़ैर ये सब कल लिख लिजिएगा,
आज तो लिखना है ना आपको ,
उनकी गर्दन पे लहराती जुल्फों का जाल.
prani.......
सच्चाई
विषय क्या होगा ??
क्या कहा ??
सोचा नहीं !!
लिखिएगा आप भी सबकी तरह,
उनके चेहरे का खूबसूरत रंग,
या फिर उनकी कमर का खूबशूरत मोड़।
कभी फुर्सत मिले श्रृंगार से तो,
लिखिएगा फुलवा चाची की व्यथा,
उसकी फटी साडी के भीगे पल्लू का दर्द ,
लिखिएगा उसकी बहती आँखों का मर्म,
उसका पुत्र और बहु के प्रति वात्सल्य ,
लिखिएगा कैसे मोहताज़ है,
भोजन को वो ,
कैसी लाचार है जीवन को वो।
लेकिन कँहा हो पाएगा ये,
आपकी xcel शीटों से भरी जिंदगी से,
अगर मिलेगा आपको थोड़ा सा वक़्त,
तो आप तो लिखेंगे ना उनके सुर्ख लाल होंठ।
अगर वक़्त मिल जाये इन सबसे ,
तो लिखिएगा उस कुतिया की कथा,
जो कल ट्रक के नीचे आकर चिपट गयी ,
और लिखिएगा उसके नवजात पिल्लों की व्यथा,
किंकियाते रहे वंही जो चारो ओर ,
खींचते रहे स्तनों को उसको ,
दूध के मोह में,
लिखिएगा कितने व्यस्त थे उस वक़्त आप ,
लिखने में उनकी साड़ी के पल्लू का रंग।
अगर साहस हो कलम में,
तो लिखिएगा इखलाख की कहानी ,
लिखिएगा उस भीड़ का रोष, लिखिएगा लाठी की हर चोट,
लिखिएगा जरूर उसका दोष ,
और अगर हिलने लगे कलम,
तो लिख दीजिएगा बीफ़ को गाय का गोश्त।
क्या कहा ??
बहुत दर्द है इन सबमें !!
लोग सुनना पसंद नहीं करेंगे !!
अजी ये कविता कन्हा है ??
ये तो आईना है।
और जिसको आइना देखने से गुरेज़ हो ,
उसकी मानसिकता पे सवाल जरूर उठाइएगा।
ख़ैर ये सब कल लिख लिजिएगा,
आज तो लिखना है ना आपको ,
उनकी गर्दन पे लहराती जुल्फों का जाल.
prani.......
सच्चाई
No comments:
Post a Comment