Sunday, 23 September 2012

TUU

कहती है धडकन  बार बार की ,

काश तुने ना  छोड़ा होता साथ , 

तो हम भी कुछ यूं ना होते 

तन्हा रातो में ना करवट बदल बदल  के रोते ..

एक बार जो samagh गयी  होती mughe तू ,

तो तेरी  राहों में इतने   गम ना होते । 

एक बार बताया तो होता ,

कुछ ऐसा कर जाते  की ,

तेरी धड़कन में हम ही  हम  होते।

आज भी कहते हैं हम की 

आज जो रोता है तू यूं ,

साथ उनके होकर के।

साथ जो रोता हमारे ,

तो,

इस दुनिया में हम न होते। 


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