कहती है धडकन बार बार की ,
काश तुने ना छोड़ा होता साथ ,
तो हम भी कुछ यूं ना होते
तन्हा रातो में ना करवट बदल बदल के रोते ..
एक बार जो samagh गयी होती mughe तू ,
तो तेरी राहों में इतने गम ना होते ।
एक बार बताया तो होता ,
कुछ ऐसा कर जाते की ,
तेरी धड़कन में हम ही हम होते।
आज भी कहते हैं हम की
आज जो रोता है तू यूं ,
साथ उनके होकर के।
साथ जो रोता हमारे ,
तो,
इस दुनिया में हम न होते।
काश तुने ना छोड़ा होता साथ ,
तो हम भी कुछ यूं ना होते
तन्हा रातो में ना करवट बदल बदल के रोते ..
एक बार जो samagh गयी होती mughe तू ,
तो तेरी राहों में इतने गम ना होते ।
एक बार बताया तो होता ,
कुछ ऐसा कर जाते की ,
तेरी धड़कन में हम ही हम होते।
आज भी कहते हैं हम की
आज जो रोता है तू यूं ,
साथ उनके होकर के।
साथ जो रोता हमारे ,
तो,
इस दुनिया में हम न होते।
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