Saturday, 29 September 2012

UNKI YADON ME.

 उनकी    यादों में  दिल  से  तो खूब   रोया ,आँखों  से रो ना  सका।  
उनको  पाने की खाव्हिश  की, जिनका  कभी  हो ना सका।
इन्ही कम्बक्त  आँखों से देखता रहा, उन्हें  दूर जाते   हुए,
  मगर अपने इस मंजर  पर  भी फूट कर रो ना सका।
उनकी हर एक याद   सीने से लगाये   हुए ,
मै  एक रात भी चैन  से सो ना सका।
उनको   चाहा था हर घडी मैंने ,
मगर  जुबां से ये  बात  कह ना सका।
उनकी एक मुस्कान पे   ,जिन्दगी  थी  कुर्बान मेरी।
मगर अफ़सोस है की,हाल-ऐ-दिल उनसे   कह ना सका।
उनको पलकों पे  रखने की चाहत थी ,
उनकी आँखों में बस  जाने की खवाहिश थी,
मगर  क्या करु ............
पास उनके  कभी रह ना सका।
वो  तो कब का चले गए थे  छोड़  मुझे तनहा अकेला,
मगर मै  आज तलक ,उनकी यादों   के बिना  रह ना सका।
उनकी यादों में दिल से तो खूब रोया,
आँखों से रो न सका ,की उनको पाने की खाव्हिश की,
जिनका कभी हो न सका।
                                 P R A N I.

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